आपने गौर किया होगा कि ऐसे कई वीमेन मिथ मनी सेविंग्स को लेकर बोले गए हैं। आइए जान लेते हैं कि ऐसे कौन-कौन से मिथ रहे हैं।
पुरुष वित्त में बेहतर होते हैं

इस प्रचलित धारणा को बेहद गंभीरता से सच मान लिया जाता है कि लड़के लड़कियों से वित्त के मामले में अधिक समझदार हैं। जी हां, फिडेल्टी इन्वेस्टमेंट्स के शोध से पता चला है कि महिला निवेशक, (Women investors, less trading art and goal-oriented vision) कम ट्रेडिंग आर्ट और कि लक्ष्य ओरिएंटेड दृष्टिकोण के कारण पुरुषों की तुलना में औसतन 0.4 प्रतिशत वार्षिक बेहतर प्रदर्शन करती हैं। वहीं महिलाओं की कोशिश होती है कि वे महिलाएं कम जोखिम उठाती हैं, जबकि विशेषज्ञ तर्क देते हैं कि महिलाएं वास्तव में जोखिम के प्रति जागरूक होती हैं। वे निवेश करने से पहले किसी साधन को समझने को प्राथमिकता देती हैं और जोखिमों को विशिष्ट दीर्घकालिक लक्ष्यों, जैसे सेवानिवृत्ति या शिक्षा के साथ जोड़ती हैं। अगर वित्तीय नियोजन की बात करें, तो कई बार यह भी महिलाओं को एहसास कराया जाने लगता है कि उनके लिए वित्तीय नियोजन बहुत जटिल है और कई महिलाओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि निवेश के लिए उनमें गणित की समझ की कमी है। जबकि वास्तविकता में, फाइनेंशियल गणित की तुलना में कैश फ्लो और रिस्क मैनेजमेंट जैसी अवधारणाओं को समझने से अधिक संबंधित है।
खर्च के लिहाज से
अगर हम महिलाओं के खर्च को भी देखें, तो महिलाएं खर्च के लिहाज से अंधाधुंध खर्च करने वाली मानी जाती हैं और महिला पत्रिकाओं में अक्सर महिलाओं को अत्यधिक खर्च करने वाली बताया जाता है, लेकिन आंकड़े की बात करें, तो यह बताते हैं कि पुरुष आमतौर कई मटेरेलिस्टिक चीजों पर अधिक खर्च करते हैं। जबकि हकीकत यह भी है कि आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर आय स्तर पर महिलाएं वास्तव में पुरुषों की तुलना में अपनी तनख्वाह का अधिक प्रतिशत बचाती हैं।
एक सोच यह भी

कई महिलाओं के जेहन में यह बातें चलती हैं कि कुछ महिलाएं निवेश में देरी करती हैं, यह सोचकर कि उनका भावी साथी उनके वित्त का प्रबंधन करेगा, फिर वे उनके भरोसे सब छोड़ कर आगे बढ़ती हैं और यह बेहद खतरनाक स्थिति है, जिससे बचने की कोशिश करनी चाहिए। यह खतरनाक स्थिति है, क्योंकि महिलाएं आमतौर पर पुरुषों से अधिक समय तक जीवित रहती हैं और उन्हें अपने रिस्क फैक्टर के बारे में सोच कर चलना चाहिए। यह सोच भी गलत है कि निवेश सिर्फ पुरुषों का काम है। पारंपरिक वित्तीय सलाहकार मॉडल अक्सर महिलाओं की अनदेखी करते हैं या यह मान लेते हैं कि उनकी संपत्ति विरासत से आई है न कि उनके अपने करियर से। इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है की संयुक्त निर्णय हमेशा बेहतर होते हैं, जबकि कई महिलाएं गलत धारणा रखती हैं कि उन्हें अलग खाते नहीं रखने चाहिए। विशेषज्ञ व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र निधि बनाए रखने की सलाह देते हैं।
व्यस्ततता एक बहाना है
कई महिलाएं ऐसी होती हैं, जो हमेशा बहाने बनाती हैं कि इसके बारे में बाद में सोचूंगी, अभी तो मैं काफी व्यस्त चल रही हूं। इस सोच से भी खुद को अलग करके देखने की जरूरत है। जबकि इसे पूर्ण रूप से ठीक करने की जरूरत है और हर सप्ताह या महीने कुछ समय निकालकर अपनी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना भी जरूरी है, साथ ही आपको अपने खर्चों पर नजर रखने की सख्त जरूरत होनी चाहिए और साथ ही भविष्य की योजनाओं के बारे में भी सोचना चाहिए। साथ ही इस बात का ध्यान रखें और इस बात को याद रखें कि अपने वित्त पर नियंत्रण रखना, आपके मनचाहा जीवन बनाने की दिशा में एक सक्रिय कदम है। इसलिए खर्च करने की आदतों, कैश फ्लो और बजट पर नजर रखना, आपकी वित्तीय यात्रा की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
जब अधिक कमाएंगे, तब बचत करेंगे
इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आपको सबसे पहले, एक व्यावहारिक बजट बनाना है और हर महीने अपनी आय का एक हिस्सा बचत के लिए अलग रख देना है और साथ ही छोटी-छोटी रकम भी समय के साथ जमा होकर आपको एक सुरक्षा कवच प्रदान कर सकती है और आपको अपने लक्ष्यों को पूरा करने की आजादी दे सकती है। इसलिए आपकी कमाई जितनी भी हो, आपको छोटे से शुरुआत करनी होगी और सेविंग करनी होगी, तभी आप एक बेहतर भविष्य बना पाएंगी।
उम्र के लिहाज से बचत

एक बात का खास ख्याल रखें कि आपको अपने उम्र के अनुसार सेविंग्स रखनी चाहिए, जैसे अगर आप 20 और 30 वर्ष की महिलाएं हैं, तो आपको बजट बनानी चाहिए, साथ ही नकदी प्रवाह का प्रबंधन करें, लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और सेवानिवृत्ति के लिए बचत करनी चाहिए। साथ ही पर्याप्त बीमा खरीदना जरूरी है। साथ ही साथ चिकित्सा संबंधी खर्चों, शादी के खर्चों, बेबी शावर और अवकाश के लिए आपातकालीन निधि रखना भी जरूरी है। अगर 40 वर्ष की महिलाओं की बात करें, तो सेवानिवृत्ति निधि जमा करें, ऋण चुकाएं। बच्चों की शिक्षा और आश्रित माता-पिता के लिए देनदारियों और लक्ष्यों की सुरक्षा के लिए सावधि जीवन बीमा कराएं। साथ ही गंभीर बीमारी कवर के साथ-साथ उच्च स्वास्थ्य बीमा कवरेज भी लें। अगर बात 50 वर्ष की महिलाओं की करें, तो संपत्ति वितरण चरण की योजना बनाएं और बच्चों के बड़े होकर घर छोड़ने के बाद की जरूरतों का प्रबंधन करें। स्वास्थ्य मुद्रास्फीति के अनुरूप स्वास्थ्य बीमा कवरेज को बढ़ाते रहें।
कुछ जरूरी सुझाव
एक बात का ख्याल आपको रखना चाहिए कि आप अपने नाम पर संपत्ति अवश्य रखें। साथ ही महिलाओं को अपना धन अलग रखना चाहिए। इसके अलावा, अपने धन पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। किसी मार्गदर्शक या सलाहकार से सहायता लें। साथ ही विवाह के खर्चों को संभालते समय, माता-पिता द्वारा दिए और प्राप्त किए गए सभी बिलों और उपहारों की सूची संभाल कर रखें। इस बात का भी ख्याल रखें कि आपके पति के जीवन बीमा में यह प्रावधान शामिल हो ताकि कोई भी आपका अधिकार न छीन सके।