स्मार्ट बजटिंग एक खास तरीका होता है कि आप किस तरह से अपनी सेविंग का सही इस्तेमाल कर सकें, क्योंकि नयी फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत हो चुकी है, आइए जानते हैं विस्तार से।
नए फाइनेंशियल ईयर को न लें हल्के में

फाइनेंशियल एक्सपर्ट पल्लवी कहती हैं कि स्मार्ट बजटिंग का सबसे सही तरीका यही है कि सबसे पहले तो फिजूलखर्ची से पूर्ण रूप से बचना होगा, क्योंकि फिनांस के लिहाज से यह साल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्व स्तर पर कई तरह के बदलाव हुए हैं, इसलिए इसे गंभीरता से लें। स्मार्ट बजटिंग के लिहाज से 2026-27 का वित्तीय वर्ष काफी अहम है। अब सिर्फ टैक्स बचत पर निर्भर रहने के बजाय अनुशासित और लक्ष्य-आधारित प्लानिंग पर ध्यान देना जरूरी हो गया है, क्योंकि इस साल के बजट में टैक्स स्लैब को स्थिर रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले अपनी वित्तीय स्थिति का ऑडिट करें और कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड तैयार रखें। साथ ही, अपनी जरूरतों और निवेश को सही ढंग से मैनेज करने के लिए 50/30/20 के बजट फॉर्मूले को अपनाना एक समझदारी भरा कदम साबित होगा।
अपनी आर्थिक सेहत का फिर से आकलन करें
अपनी मौजूदा आय, खर्चों, ज्यादा ब्याज वाले कर्ज (EMIs) और क्रेडिट स्कोर का ऑडिट करें, ताकि कमियों का पता चल सके। गौरतलब है कि अपनी जरूरतों (किराया, खाना, यूटिलिटी बिल) के लिए 50 प्रतिशत अपने शौक को पूरा करने के लिए 30 प्रतिशत और बचत और निवेश के लिए 20 प्रतिशत हिस्सा तय करें।
निवेश को प्राथमिकता दें

पल्लवी कहती हैं कि एक बात और समझने वाली है कि आपको महंगाई से निपटने के लिए ELSS, PPF, FDs और SIPs जैसे अनुशासित निवेश विकल्पों पर ध्यान देना जरूरी है, वहीं एक मजबूत जीवन बीमा प्लान को सुरक्षा कवच के तौर पर लें, क्योंकि अब आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी ज्यादातर लोगों पर ही आ गई है। एक बात का और अपने खर्चों पर नजर रखने और बचत को ऑटोमेट करने के लिए ऐप्स का इस्तेमाल करें। साथ ही साथ चूंकि टैक्स की दरें स्थिर हैं, इसलिए नियोजित खर्चों और लंबे समय के आर्थिक लक्ष्यों के जरिए अपनी आय से ज्यादा से ज्यादा बचत पर ध्यान दें।
प्रीडिक्टेकल बजट
वर्ष 2026 के बजट की बात करें, तो बाजार के छोटे-मोटे रुझानों के पीछे भागने के बजाय, सब्र रखने और लंबे समय के लिए लगातार एसेट एलोकेशन करने को बढ़ावा देता है। आपको यह सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है कि पक्का करें कि आप नई टैक्स व्यवस्था को अच्छी तरह समझ लें, जो आसान और कम दरों वाले टैक्स सिस्टम को बढ़ावा देती है। वहीं निजी जिम्मेदारी पर बढ़ते जोर को देखते हुए, एक मजबूत इंश्योरेंस प्लान को सुरक्षा कवच के तौर पर अपनी योजना में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
रणनीति तय करें

अंधाधुंध निवेश करने के बजाय, अपनी रणनीति को खास लक्ष्यों के साथ देखें, वहीं कम समय के लक्ष्य, जैसे छुट्टियां मनाना या गैजेट्स खरीदना और साथ ही मध्यम समय के लक्ष्य, जैसे कार खरीदना, लंबे समय के लक्ष्य, जैसे रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई, यह तरीका अनुशासन बढ़ाता है और बिना सोचे-समझे लिए गए फैसलों को कम करता है।