इंटीरियर डिजाइनर बनना है, तो इसमें करियर बनाने के लिए आपको कुछ तरीकों को अपनाने की जरूरत है और कुछ जानकारी की भी। आइए विस्तार से जानते हैं।
योग्यता

इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए आपको मुख्य रूप से 12वीं के बाद एक प्रोफेशनल कोर्स करना होता है, साथ ही तकनीकी स्किल्स और क्रिएटिविटी विकसित करनी होती है। यह करियर न सिर्फ घर या ऑफिस को सजाने के बारे में है, बल्कि स्पेस का सही इस्तेमाल और सेफ्टी को ध्यान में रखकर उसे आकर्षक बनाने की कला है। इसे करना काफी टफ नहीं होता है, बस आपको इसे करने की कला के बारे में सोचना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। अगर शैक्षणिक योग्यता की बात करें, तो 12वीं पास, किसी भी स्ट्रीम से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना जरूरी है। वहीं इसके कुछ एंट्रेंस एग्जाम भी होते हैं, जैसे कुछ टॉप कॉलेजों (जैसे NID, NIFT, या IIT) में एडमिशन के लिए UCEED, NID DAT या AIEED जैसी परीक्षाएं देनी होती हैं।
ऐसे करें कोर्स का चुनाव
एक बात का आपको खास ख्याल रखना है कि आप अपनी जरूरत और समय के हिसाब से इनमें से कोई भी कोर्स चुन सकती हैं। इसके लिए आपको 3 से चार साल का डिग्री कोर्स करना होगा और साथ ही बैचलर ऑफ़ डिजाइन और बैचलर ऑफ इंटीरियर डिजाइन या बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर में कोर्स करना होगा। अगर डिप्लोमा कोर्सेज की बात करें, तो दो सालों का भी कोर्स होता है, तो अगर आप जल्दी करियर शुरू करना चाहते हैं, तो डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइनिंग एक अच्छा विकल्प है। वहीं सर्टिफिकेट कोर्सेज के लिए (6 महीने से 1 साल लग सकते हैं और ये छोटे कोर्सेज बेसिक स्किल्स और विशिष्ट सॉफ्टवेयर सीखने के लिए होते हैं।
जरूरी टेक्निकल स्किल्स

अगर जरूरी टेक्निकल स्किल्स की बात करें, तो सिर्फ क्रिएटिव होना काफी नहीं है, आपको आधुनिक टूल्स की जानकारी भी होनी चाहिए और साथ ही सॉफ्टवेयर की भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए, जैसे कि AutoCAD, SketchUp, Revit, 3ds Max और Adobe Creative Suite का ज्ञान अनिवार्य है। वहीं
डिजाइन प्रिंसिपल्स का भी ख्याल रखना जरूरी है, कलर थ्योरी, लाइटिंग, स्पेस प्लानिंग और मटेरियल की गहरी समझ विकसित करें। अगर पोर्टफोलियो और इंटर्नशिप की बात करें, तो पढ़ाई के दौरान किसी अच्छी डिजाइन फर्म में इंटर्नशिप जरूर करें। इससे आपको प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और क्लाइंट डीलिंग का प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा। वहीं अपने बेहतरीन काम (चाहे वो क्लास प्रोजेक्ट हों या इंटर्नशिप) का एक प्रोफेशनल पोर्टफोलियो तैयार करें। नौकरी पाने या फ्रीलांस काम शुरू करने के लिए यह सबसे जरूरी चीज है। यह जानना भी आपके लिए बेहद जरूरी है कि भारत में एक फ्रेशर इंटीरियर डिजाइनर की शुरुआती सैलरी ₹3 लाख से ₹8 लाख प्रति वर्ष तक हो सकती है, जो अनुभव के साथ काफी बढ़ जाती है।
प्रोफेशनल डिजाइनिंग रोल्स
इंटीरियर डिजाइनर की डिमांड भारत में बहुत है, इसकी वजह यह है कि समय-समय पर घर के इंटीरियर में बदलाव होते ही रहते हैं। इसलिए काफी काम मिल जाता है, जैसे कि घरों, फ्लैट्स और विला के डिजाइन और डेकोरेशन पर काम करना। वहीं ऑफिस, रिटेल स्टोर्स, होटल्स और रेस्टोरेंट्स जैसे व्यावसायिक स्थानों के लिए डिजाइनिंग का काम भी चलता रहता है, वहीं अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए ऐसे डिजाइन बनाना जो सुरक्षित और फंक्शनल हों। साथ ही बड़े कॉर्पोरेट ऑफिसों के लिए केबिन, कॉन्फ्रेंस रूम और कॉमन स्पेस डिजाइन करना भी इनका ही काम होता है।
क्रिएटिविटी और स्पेशलाइजेशन

अगर इनके स्पेशलाइजेशन की बात करें, तो सेट डिजाइनर के रूप में भी काफी लोग काम करने की कोशिश करते हैं और फिल्मों, टीवी शो और थिएटर प्रस्तुतियों के लिए सेट्स तैयार करना, इनका ही काम होता है। वहीं क्लाइंट की जरूरत के अनुसार फंक्शनल और स्टाइलिश फर्नीचर बनाना। वहीं किसी स्थान की लाइटिंग व्यवस्था को आकर्षक और उपयोगी बनाना। वहीं संग्रहालयों और व्यापार मेलों के लिए डिस्प्ले डिजाइन करना भी इनका काम होता है।
शुरुआत
अगर अपनी डिजाइन फर्म की बात करें, तो आप अपनी खुद की कंपनी शुरू कर सकते हैं और क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स सीधे ले सकते हैं। वहीं फ्रीलांस कंसल्टेंट के रूप में भी काम कर सकते हैं और स्वतंत्र रूप से काम करते हुए क्लाइंट्स को डिजाइन और स्पेस प्लानिंग की सलाह देना। वहीं प्रोडक्ट डिजाइनर के रूप में भी काम कर सकते हैं। जैसे कि घर की सजावट से जुड़े खास प्रोडक्ट्स भी बना सकते हैं। इनके अलावा, डिजाइन के कॉन्सेप्ट से लेकर काम खत्म होने तक पूरी टीम और बजट को मैनेज करना। साथ ही कंस्ट्रक्शन और रिनोवेशन साइट पर जाकर काम की क्वालिटी और प्रोग्रेस की निगरानी करना भी इनका ही काम होता है।