बच्चों को यूं जोड़े रखें होली की परंपराओं से इन दिनों बच्चों का पूरा ध्यान सोशल मीडिया पर ही होता है और यही वजह है कि यह जरूरी है कि बच्चों को त्यौहारों के ट्रेडिशनल यानी पारम्परिक रूपों से भी जोड़ा जाये और होली से अच्छा मौका कुछ नहीं हो सकता है। आइए जानें विस्तार से।
कहानी सुनाएं

आपके बच्चे आपकी कहानी को सुनेंगे और समझेंगे, क्योंकि उन्हें कहानियां सुनने में काफी मजा आता है, इसलिए बच्चों को कहानियां सुनानी जरूरी हैं। तो आप होली या किसी भी त्यौहार के महत्व को उन्हें समझाएं और तरीके से समझाएं। दरअसल, यह वास्तविकता है कि जब बच्चे उत्सव के पीछे का कारण समझते हैं, तो वे उससे अधिक गहराई से जुड़ पाते हैं। जैसे अगर उदाहरण के तौर पर देखें, तो प्रहलाद और होलिका की सुनाई जा सकती है और उन्हें इस बात का एहसास दिलाया जा सकता है कि युवा प्रह्लाद कितना बहादुर था, जैसे कि युवा प्रह्लाद, जिनकी भगवान विष्णु में आस्था ने उन्हें उनके अहंकारी पिता और उनकी मौसी होलिका की आग से बचाया। यह कथा साहस, आस्था और अच्छाई की विजय का संदेश देती है। वहीं अगर बात राधा और कृष्ण की कहानी की हो तो, उन्हें समझाइए कि रंगों की परंपरा की शुरुआत भगवान कृष्ण द्वारा राधा के चेहरे पर खेल-खेल में रंग लगाने से हुई, जो समानता और मित्रता का प्रतीक है। दरअसल, छोटे बच्चों के लिए इन कथाओं को रोचक बनाने के लिए कठपुतलियों, चित्र पुस्तकों या खिलौनों के साथ भूमिका-निर्वाह का उपयोग करना अच्छा रहेगा और वह इनकी परम्पराओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
तैयारियों में शामिल करें
एक बात और आपको समझना है कि बच्चे जब खुद से गतिविधियों को करते हैं, तो अधिक अच्छे तरीके से चीजों से जुड़ते हैं, जैसे कि उन्हें पारंपरिक तैयारियों में शामिल करने के साथ, उन्हें अन्य बातें भी समझाएं और उन्हें कुछ जिम्मेदारियां भी दें, ऐसा करने से उनके अंदर अपनेपन की भावना विकसित होती हैं और वो चीजों को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर पाते हैं। जैसे कि आप उन्हें साथ में खाना बनाने में शामिल करें और साथ ही उन्हें उम्र के हिसाब से उपयुक्त कामों में मदद करने दें, जैसे गुझिया, मालपुआ या ठंडाई जैसी पारंपरिक मिठाइयों के लिए आटा गूंथना या सामग्री गिनना इन चीजों में शामिल करें, तो वे इसके महत्व को समझ पाएंगे, साथ ही उन्हें प्राकृतिक रंग बनाने की कला में भी जोड़ें, जैसे हल्दी (पीला), चुकंदर (मैजेंटा) या सूखे फूलों जैसी रसोई की सामग्रियों से पर्यावरण के अनुकूल रंग बनाकर पर्यावरण के प्रति सम्मान सिखाएंइनके अलावा, उन्हें प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाने या परिवार और दोस्तों के लिए हस्तनिर्मित होली कार्ड बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही सारी पारम्परिक चीजें बनाएं और उन्हें इसे बनाने की वजह बताएं, रेडीमेड से अच्छा उन्हें साथ में रखें और सब सिखाएं। इससे वह इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाएंगे।
बड़ों का सम्मान

होली या किसी भी तरह के त्यौहार में आपको बड़ों को सम्मान देने की कोशिश करनी चाहिए, तभी बच्चे भी सीखेंगे, जैसे आप बड़ों को इस दिन प्रणाम करें, उनके पैरों में अबीर डालें, प्रणाम करें, उनसे आशीर्वाद लें, घर के पकवान उन्हें दें सबसे पहले, भोग लगाएं, उनकी राय समझें, उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका ख्याल रखें और इन सबको करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करें, बच्चे ये सब देखेंगे तो सीखेंगे, बड़ों को भी चाहिए कि वह बच्चों को ख़ुशी-ख़ुशी नेग दें, तो बच्चे उसके महत्व को समझेंगे और यह ट्रेडिशन आगे बढ़ता जाएगा। बच्चों को बुजुर्गों के साथ पकवान का मजा लेने दें, इससे वे बड़ों का आदर करने में कमी नहीं करेंगे। घर पर मेहमानों को बुलाएं, तो बच्चों को मेहमानवाजी करना सिखाएं।
सुरक्षित और मनोरंजक सांस्कृतिक अनुभव
बच्चे खेल-खेल में भी काफी कुछ समझ लेते हैं, जैसे पारंपरिक खेलों को बच्चे की उम्र और सहजता के अनुसार ढालना सबसे अच्छा होता है। तो सेंसरी संबंधी प्ले खिलवाने की कोशिश करें, उनमें बुजुर्गों को भी शामिल करें, बच्चों को सिखाएं कि होली एन्जॉय करते हुए घर के बुजुर्गों को भी शामिल करें। उनके साथ किसी भी तरह की बदतमीजी न करें। इनके अलावा, कलात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने की कोशिश करें, जैसे एक पुरानी सफेद चादर पर रंग छिड़ककर "होली फोटो बूथ" बनाएं या उन्हें अपने हाथों के निशान का उपयोग करके अपनी होली टी-शर्ट डिजाइन करने दें। इससे वह कलात्मक बनेंगे। साथ ही पारंपरिक होली गीत या बॉलीवुड धुनें बजाकर एक ऐसा उत्सवपूर्ण माहौल बनाएं, भद्दे और अश्लील गानों से दूर रखें। होली में बच्चे किसी के साथ बदतमीजी न करें, मस्ती के नाम पर यह भी आपको ही सिखाना है, इसके लिए भी कुछ खेल खेले जा सकते हैं, जो आप खुद से डिजाइन करें।
सोशल मीडिया से नहीं, विशेज में हो एहसास

कोशिश करें कि बच्चे इस दिन अपने घर के लोगों से बातचीत करें, सिर्फ मेसेज करके न छोड़ें और सबके साथ खुशियां बांटें, यह भी बेहद जरूरी है कि वह सिर्फ सोशल किड न बन कर रहें। साथ ही एकता और समानता में उन्हें विश्वास रखना समझाएं। "एक रंग" की अवधारणा का उपयोग करके समझाएं कि रंगों के नीचे सभी एक समान दिखते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव और समावेश को बढ़ावा मिले। सिखाएं कि होली बीते हुए गलतफहमियों को भुलाकर गले मिलकर या मिठाई बांटकर रिश्तों को फिर से मजबूत करने का दिन है। साथ ही बच्चों को हमेशा दूसरों को रंग लगाने से पहले अनुमति मांगना सिखाएं, जिससे उनमें व्यक्तिगत सीमाओं का बोध विकसित हो। साथ ही इस दिन पारम्परिक कपड़े पहनें और फोटो लें, इससे बच्चे हर्षोल्लास के साथ यह सबकुछ एन्जॉय करेंगे।