करियर में सफलता पाने के लिए कई बातें सोची जानी चाहिए। खासतौर से वर्कप्लेस पर आपको इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं विस्तार से।
क्या होते हैं वर्कप्लेस स्किल्स

वर्कप्लेस स्किल्स वे टैलेंट, गुण और योग्यताएं हैं, जो आपको काम पर अच्छा परफॉर्म करने में मदद कर सकती हैं। वर्कप्लेस स्किल्स या तो हार्ड स्किल्स होती हैं या सॉफ्ट स्किल्स। हार्ड स्किल्स वे मुख्य क्षमताएं और ज्ञान हैं, जो आपको नौकरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी हैं। वहीं सॉफ्ट स्किल्स सामान्य स्किल्स होती हैं, जो वर्कप्लेस में मददगार होती हैं और आपके परफॉर्मेंस को बेहतर बनाती हैं, जैसे ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स और लीडरशिप स्किल्स संभालती हैं। अगर वर्कप्लेस स्किल्स की बात करें, तो टेक्निकल स्किल्स में वे मशीनरी, उपकरण या कंप्यूटर प्रोग्राम शामिल होते हैं, जिन्हें आपको किसी खास रोल के लिए जानना जरूरी है। ये स्किल्स फील्ड और इंडस्ट्री के हिसाब से अलग-अलग होती हैं। वहीं प्रोफेशनल स्किल्स में सामान्य व्यवहार और स्किल्स शामिल हो सकती हैं, जो प्रोफेशनल माहौल में सफलता के लिए जरूरी हैं, जैसे पब्लिक स्पीकिंग। वहीं इंटरपर्सनल स्किल्स वे स्किल्स हैं, जो आपको दूसरे लोगों के साथ अच्छी तरह से बातचीत करने में मदद करती हैं, जैसे कम्युनिकेशन और सुनने की स्किल को कहते हैं।
रखें कुछ बातों का ख्याल
वर्कप्लेस पर सफलता साफ पर्सनल लक्ष्यों, मजबूत इंटरपर्सनल आदतों और लगातार ग्रोथ के प्रति कमिटमेंट के कॉम्बिनेशन से मिलती है। इसलिए कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। आपको इन बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है कि जल्दबाजी में या ज्यादा काम करने से कुछ नहीं मिलता है, इसके लिए आपको स्मार्ट लक्ष्य निर्धारित करने के बारे में सोचना चाहिए और साथ ही ऐसे उद्देश्य परिभाषित करने की जरूरत है, जो विशिष्ट हों और साथ ही प्रासंगिक और समय-सीमा वाले भी हों। साथ ही व्यक्तिगत करियर लक्ष्य स्थापित करने से लंबी अवधि की महत्वाकांक्षाओं को प्रबंधनीय अल्पकालिक कार्यों में बदलने में मदद मिलती है। आपको इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि आपको अपने कामों में पहल कैसे करना है। साथ ही निर्देशों का इंतजार करने में और सक्रिय रूप से समस्याओं की पहचान करें और समाधान प्रस्तावित करना जरूरी है।
अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेने से नेतृत्व क्षमता

एक बात का खास ख्याल रखें कि आप जब किसी कम्पनी का हिस्सा बनती हैं, तो इस बारे में जरूर सोचें कि आपको सिर्फ अपनी दी गई जिम्मेदारियां पूरी नहीं करनी है, बल्कि खुद मांग कर जिम्मेदारियां उठानी भी हैं और इससे ही कंपनी की सफलता के प्रति प्रतिबद्धता दिखती है। इसलिए यह भी बेहद जरूरी है कि आप इन बातों का ध्यान रखें। आपको समय प्रबंधन में महारत हासिल करने की भी जरूरत है। इसलिए आपको अपने दिन को व्यवस्थित करने के लिए पोमोडोरो तकनीक या टाइम ब्लॉकिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। इस बात का ख्याल अधिक रखें कि सुबह सबसे पहले अपना सबसे महत्वपूर्ण या कठिन कार्य पूरा करें। इससे धीरे-धीरे आपके बाकी काम भी व्यवस्थित होते जाएंगे।
प्रभावी ढंग से संवाद करें
एक बात का और ख्याल रखें कि आपको सक्रिय रूप से सुनने का अभ्यास करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि आपका मौखिक और लिखित संचार स्पष्ट और पेशेवर हो। अपेक्षाओं को अंडरलाइन करने और प्रगति को ट्रैक करने के लिए अपने प्रबंधक के साथ नियमित 1ऑन1 बैठकें करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि पाठ्यक्रम लेकर या प्रमाण पत्र प्राप्त करके उद्योग के रुझानों और प्रौद्योगिकियों के साथ रूबरू रहें, ताकि आपको काफी फायदे हों और आपको विकास की मानसिकता अपनाने से कोई रोक न पाए और साथ ही आप असफलताओं को सीखने के अवसरों के रूप में देख पाएं। इस बात का आपको अच्छे से ध्यान रखना है।
टीम प्लेयर बनना है जरूरी

अपने सहकर्मियों के साथ मुकाबला करने के बजाय उनके साथ मिलकर काम करें। सफलता अक्सर सामूहिक होती है; दूसरों की जीत का जश्न मनाएं और जरूरत पड़ने पर सहायता दें। साथ ही फीडबैक मांगें और स्वीकार करें और सक्रिय रूप से रचनात्मक आलोचना मांगें और इसका उपयोग अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए करें। आपके लिए यह भी जरूरी है कि एक नेटवर्क बनाएं और बढ़ाएं, नेटवर्क बढ़ाने से काफी फायदे होते हैं और कोई भी संगठन ऐसे लोगों को पसंद करता है, जो काफी नेटवर्किंग कर सके या जिसको यह स्किल अच्छी तरह से आती हो और साथ ही साथ अपने संगठन के अंदर और बाहर संबंध बनाएं। आपको एक कोशिश और करनी चाहिए कि एक अच्छा मेंटोर ढूंढें, क्योंकि ढूंढने से महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिल सकता है और आपको करियर की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। साथ ही साथ ईमानदारी और विश्वसनीयता बनाए रखने की कोशिश करना अच्छा रहता है और साथ ही समय की पाबंदी रखना भी अच्छा रहता है। अपने वादों को पूरा करें, और अपनी सफलताओं और गलतियों दोनों की जिम्मेदारियां लें। एक बात का और ख्याल रखें कि काम-जीवन संतुलन को प्राथमिकता दें, नियमित ब्रेक लेकर और खुद की देखभाल के लिए समय निकालकर बर्नआउट से बचें। लंबे समय तक प्रोडक्टिविटी बनाए रखने के लिए अपने मानसिक स्वास्थ्य का प्रबंधन करना आवश्यक है।
आत्मविश्वास
यह बेहद जरूरी है कि खुद पर और अपने काम पर विश्वास किया जाये। जब आप अपने परफॉर्मेंस पर गर्व करते हैं, तो आपके साथी और मैनेजर इस बात पर ध्यान देते हैं, क्योंकि यह कंपनी के प्रति आपकी कमिटमेंट और खुद को मोटिवेट करने की आपकी काबिलियत को दिखाता है। एक कर्मचारी में आत्मविश्वास देखकर एम्प्लॉयर्स को पता चलता है कि आप बड़े प्रोजेक्ट्स को मैनेज कर सकते हैं और कंपनी में आगे बढ़ सकते हैं।
आत्मविश्वासी होने का मतलब यह भी है कि आप अपने फैसलों पर भरोसा करें और उनका बचाव कर सकें। तनाव वाली स्थितियों में, लोग अक्सर ऐसे टीम मेंबर्स की तरफ देखते हैं, जो काबिल दिखते हैं और दबाव में भी शांत रहते हैं। इसलिए इन बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।