ट्यूशन महिलाओं के लिए छोटे शहर में आजीविका का नया स्रोत बन चुका है। आइए जानते हैं विस्तार से।
घर बैठे काम

महिलाओं के लिए सबसे अच्छी बात यही है कि उन्हें अब कहीं भी बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है, वे घर बैठ कर ही बच्चों को आसानी से पढ़ा सकती हैं और पैसे कमा सकती हैं। उनके लिए ऐसे में घर की देखभाल करना भी अच्छा रहता है, अच्छी बात यह है कि इसमें किसी भी तरह की लागत की जरूरत है ही नहीं। आप जीरो इन्वेस्टमेंट पर काम शुरू कर सकती हैं। वहीं अगर एक फायदा यह भी होता है कि घर का एक कमरा या सिर्फ एक मेज-कुर्सी ही काफी होती है और प्रत्यक्ष आय हर महीने फीस के रूप में पक्की कमाई सीधे हाथ में आती है। इसके साथ ही साथ आप अपने अनुसार काम करने के लिए समय को लेकर फ्लेक्सिबल हो सकती हैं, इसको करने में आपको 2 से 3 घंटे देकर अच्छी कमाई हो जाती है। वहीं महिलाओं को अपनी सुविधा के अनुरूप बैच का समय चुनने की आजादी मिलती है। वहीं फीस की बात करें, तो ऑनलाइन पढ़ाने से छोटे शहर के मुकाबले ज्यादा फीस मिलती है। छोटे शहर में रहकर भी महिलाएं ऑनलाइन ऐप्स ( जूम और गूगल मीट) के जरिए बड़े शहर या विदेश के बच्चों को पढ़ रही हैं।
सामजिक प्रतिष्ठा
अगर हम गौर करें, तो उन महिलाओं को जो पढ़ाई के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं, उन्हें लोग हमेशा सम्मान की दृष्टि से ही देखते आए हैं, साथ ही कौशल विकास की बात करें, तो पढ़ने-पढ़ाने से महिलाओं का खुद का ज्ञान और आत्मविश्वास बढ़ता है। इसलिए भी महिलाओं को ट्यूशन जैसे विकल्प के बारे में सोचते रहना चाहिए। लोग उन्हें शिक्षिका के रूप में ही देखते हैं और इसलिए भी उनका आदर - सत्कार काफी होता है, क्योंकि महिलाएं बैच सिस्टम में पढ़ाने लगी हैं, साथ ही अब महिलाएं अब सिर्फ पड़ोस के एक या दो बच्चों को नहीं पढ़ातीं हैं, बल्कि वे 5-10 छात्रों के व्यवस्थित बैच चलाती हैं। साथ ही साथ खास विषय पढ़ाने पर उनका अधिक जोर रहता है और सभी विषय पढ़ाने के बजाय, महिलाएं अब गणित, इंग्लिश स्पीकिंग या विज्ञान जैसे ज्यादा मांग वाले खास क्षेत्रों में खुद को एक्सपर्ट के तौर पर पेश करती हैं। यही नहीं इससे बच्चे प्री-स्कूल की तैयारी कर पा रहे हैं और छोटे बच्चों (नर्सरी से UKG) को बेसिक फोॅनिक्स और लिखना सिखाना घर संभालने वाली महिलाओं के लिए कमाई का एक बहुत अच्छा जरिया बन गया है।
हाइब्रिड और ऑनलाइन ट्यूशन

एक खास बात यह हो गई है कि अब जरूरी नहीं है कि ये ट्यूशन आप जहां रह रही हैं , सिर्फ वहां रह कर ही पढ़ाया जाए , बल्कि अब स्मार्टफोन और टैबलेट का इस्तेमाल करके, छोटे शहरों की महिलाएं दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के छात्रों को पढ़ाती हैं। वहीं जितने घंटे पढ़ा रही हैं, उन्हें उतनी कमाई मिलती है और ऑनलाइन पढ़ाने से वे बड़े शहरों के हिसाब से फीस ले पाती हैं, जबकि छोटे शहर में रहने का खर्च कम होता है। वहीं एडटेक फ्रीलांसिंग के रूप में भी कई महिलाएं घर बैठे ही जाने-माने एजुकेशनल प्लेटफॉर्म के लिए पार्ट-टाइम ऑनलाइन ट्यूटर के तौर पर काम करती हैं।
स्किल्स डेवेलप पर ध्यान
महिलाओं की इस ओर बढ़ती रुचि से एक फायदा और भी हुआ है कि अब बच्चों को वे पढ़ाई-लिखाई के अलावा, हॉबी और स्किल क्लास में भी मदद कर रही हैं और कोडिंग और STEM पढ़ी-लिखी महिलाएं बेसिक कोडिंग, रोबोटिक्स या मेंटल मैथ (एबेकस और वैदिक मैथ) सिखाने के लिए अपनी स्किल्स बढ़ा रही हैं। साथ ही साथ क्रिएटिव आर्ट्स ट्यूशन सेंटर अब आर्ट्स, क्राफ्ट्स, हैंडराइटिंग सुधारने और फोनेटिक्स की शाम की क्लास भी शुरू करने में भी जिज्ञासु हैं।
प्रोफेशनलिज्म और कम्युनिटी का भरोसा माता-पिता की पसंद

छोटे शहरों में माता-पिता महिला ट्यूटर्स पर बहुत भरोसा करते हैं, क्योंकि वे बच्चों के साथ धैर्य रखती हैं, सुरक्षा का ध्यान रखती हैं और हर बच्चे पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देती हैं। इसलिए भी उनकी डिमांड बढ़ रही हैं। वहीं, डिजिटल मैनेजमेंट की बात करें, तो महिलाएं अब अटेंडेंस ट्रैक करने, होमवर्क शेयर करने, फीस के रिमाइंडर ऑटोमेट करने और माता-पिता को प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजने के लिए फ्री ऐप्स का इस्तेमाल करती हैं। वही बात अगर आर्थिक सशक्तिकरण और आजादी की करें, तो मुख्य आय के रूप में कई घरों में, महिलाएं व्यवस्थित ट्यूशन बैच चलाकर परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य के बराबर या उससे ज्यादा कमाई कर रही हैं। वहीं इस ट्रेंड ने शादीशुदा महिलाओं को अपनी रुकी हुई पढ़ाई फिर से शुरू करने या ज्यादा फीस पाने के लिए B.Ed. की डिग्री पूरी करने के लिए प्रेरित किया है।