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महिलाएं 'सिर्फ खुद के लिए' खाना बनाने में करती हैं कौताही

टीम Her Circle |Jul 25, 2026
महिलाएं 'सिर्फ खुद के लिए' खाना बनाने में करती हैं कौताही

अमूमन आपने घरों में देखा होगा, जब घर के पुरुष कहीं बाहर खाने की प्लानिंग में होते हैं या फिर शहर से बाहर होते हैं, तो महिलाएं हमेशा अपने खान-पान को नजरअंदाज कर देती हैं, जो कि उनकी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।

क्या है वजह

होम मेकर खुशबू श्रीवास्तव कहती हैं कि उनका मानना है कि हम महिलाएं अक्सर सिर्फ अपने लिए खाना बनाने से बचने की कोशिश करती हैं, क्योंकि पूरे हफ्ते या हर दिन हम खाना बनाते हुए और योजनाएं बनाते हुए इस कदर थक जाती हैं कि फिर हमें अपने लिए सिर्फ खाने की योजना बनाना किसी मानसिक बोझ से कम नहीं लगता है। ऐसे में सिर्फ अपने लिए या अकेले खाना बनाने के लिए खास समय निकालना किसी भी तरह की प्रेरणा नहीं दिखती है और काफी अधिक कमी महसूस होती है। गौरतलब है कि पारंपरिक रूप से खाना बनाना एक-दूसरे की देखभाल और साथ का काम माना जाता है; जब साथ में अनुभव बांटने के लिए अपने लोग न हों, तो यह एक सुखद काम के बजाय एक बोझ जैसा लग सकता है।

मेंटल लोड

योग इंस्ट्रक्टर कृपिका इस बारे में कहती हैं कि उन्हें ऐसा लगता है कि खाना पकाने में सिर्फ खाना बनाना ही शामिल नहीं होता। इसमें मानसिक श्रम भी लगता है और जैसे कि क्या खाना है यह तय करना, सामग्री की जांच करना, सब्जियां काटना और सफाई करना, सबकुछ ही शामिल होता है और यह जानना भी आपके लिए जरूरी है कि जब आप पहले से ही दैनिक जिम्मेदारियों से थके हुए हों, तो ये छोटे-छोटे फैसले निर्णय लेने में और भी अधिक परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए कुछ भी खाकर या जंक खाकर अपना गुजारा करने की कोशिश में जुटी रहती हैं महिलाएं और फिर अपनी सेहत को वो खुद नुकसान पहुंचा देती हैं।

वाहवाही पर टिकी खाने की दुनिया

मेकअप आर्टिस्ट कृति सिन्हा ऐसा मानती हैं कि महिलाओं की एक बड़ी परेशानी यह भी होती है कि उनकी दुनिया पूरी तरह से वाहवाही की दुनिया में तब्दील हो जाती है, जब तक एक घर के लोग खाने की बात करने लग जाते हैं और तारीफ़ न कर दें, बाकी महिलाओं को लगता है कि उन्होंने कुछ किया ही नहीं है। उनका खाना बनाना व्यर्थ है, जबकि यही चीज जब वह अकेले रहती हैं तो उन्हें इस कदर तारीफ सुनने की या किसी से भी अपने खान-पान की प्रतिक्रिया नहीं लेते हैं, उन्हें परेशानी होती है। इसलिए भी वह अपने खाने-पीने के बारे में नहीं सोचती हैं। कई लोगों के लिए, खाना दूसरों के साथ मिलकर खाने की परंपरा से गहराई से जुड़ा होता है। खुद के लिए खाना बनाने पर देखभाल की बाहरी सराहना नहीं मिल पाती। इसलिए भी वे अपनी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। गौरतलब है कि इतिहास में महिलाओं से घर में मुख्य देखभाल करने वाली और खाना पकाने वाली की भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती रही है। जब परिवार घर पर नहीं होता, तो यह जिम्मेदारी निभाने का दबाव कम हो जाता है और कई महिलाएं जान-बूझकर इस भूमिका से हट जाती हैं, ताकि उन्हें रसोई के काम से जरूरी ब्रेक मिल सके।

खुद को पैम्पर करना पसंद नहीं

साइकोलॉजिस्ट किरण का मानना है कि ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्हें खुद को पैम्पर करने में परेशानी होती है। वे खुशी-खुशी दूसरों के लिए घंटों खाना बनाती हैं, लेकिन जब बात सिर्फ अपने लिए खाना बनाने की आती है, तो उन्हें लगता है कि यह समय की बर्बादी है या स्वार्थ है। इनके अलावा, एक व्यक्ति के लिए खाना बनाने में भी अक्सर उतने ही गंदे बर्तन और कड़ाही-पैन इस्तेमाल होते हैं, जितने तीन लोगों के लिए खाना बनाने में। वह सोचती हैं कि एक आदमी के लिए खाना बनाना, मतलब समय की तुलना में सफाई में ज्यादा मेहनत लगती है, जिससे यह काम बहुत बेकार लगता है। एक बात और समझना है कि कई संस्कृतियों में, महिला की पहचान खाना खिलाने या पोषण देने वाली के तौर पर होती है। जब वह भूमिका निभाने के लिए कोई नहीं होता, तो उस काम को करने का अंदरूनी उत्साह भी खत्म हो जाता है। वे कभी खुद पर ध्यान नहीं देती हैं। साथ ही थोड़े-थोड़े स्नैक्स खाते रहना, जिसे कभी-कभी गर्ल डिनर भी कहा जाता है, उन्हें इससे तुरंत संतुष्टि मिलती है। इससे भूख तुरंत मिट जाती है और 45 मिनट तक खाना पकाने के बाद मिलने वाले इनाम का इंतजार नहीं करना पड़ता है। इसलिए भी वे ये तरीके अपनाती हैं।

क्या कहती हैं डायटीशियन

डायटीशियन शिल्पा कहती हैं कि एक खास बात जो आपको जरूर जानना चाहिए कि महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है कि वे अपनी सेहत का ध्यान अच्छी तरह से रखें। इसके लिए उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जैसे कि जो लोग अकेले रहते हैं या कुछ समय के लिए अकेले हैं, वे पारंपरिक और पूरा खाना बनाने की कोशिश करने के बजाय, खाना पकाने के आसान तरीकों को अपनाकर राहत पा सकते हैं, जैसे कि वे चाहें तो फॉर्मूला मील बनाने के बारे में सोचें और रेसिपी की बजाय आसान टेम्पलेट या तरीके अपनाएं। उदाहरण के लिए जैसे चावल या हरी सब्जियों के साथ कोई आसान प्रोटीन बना लेना या फिर अगर आप खाना बनाते हैं, तो ज्यादा मात्रा में बना लेना अच्छा रहेगा, तो इसके अलावा, उसे फ्रिज में रख दें और फिर जिन दिनों आपका खाना पकाने का मन न हो, तब आप उसे इस्तेमाल कर सकें। इसके अलावा, सुविधा को प्राथमिकता देने के बारे में सोचें। साथ ही पहले से कटी हुई सब्जियां और खाने के लिए तैयार सलाद या डिलीवरी ऑप्शन का इस्तेमाल करने से खाना शुरू से बनाने की थकान से बचा जा सकता है। इसलिए इन चीजों के बारे में जरूर सोचें।

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