महिलाओं की हाथों की कला ने बनाया ‘हैंडलूम विलेज’

महिलाओं की हाथों की कला का परिचय हैंडलूम कला से काफी समय से मिलता रहा है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं इसी के जरिए कमाई भी कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश के शरण गांव में कुल्लू की पारंपरिक कला महिलाओं के लिए कमाई का जरिया बन गई है। महिलाओं ने हैंडलूम से इस कदर की पहचान कायम की है कि उनके गांव को हैंडलूम विलेज घोषित कर दिया गया है। इस गांव की महिलाएं बुनाई का काम कई सालोसे कर रही हैं और उनकी बुनाई की मांग भी काफी अधिक है।
यह महिलाएं बुनाई के जरिए कई पारंपरिक चीजें बना रही हैं। खासतौर पर पारंपरिक शाल, टोपियां, बच्चों के कपड़े के साथ ऊनी सामान भी यह महिलाएं बनाती हैं। इन महिलाओं के काम में मदद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करती हैं। महिलाओं को यहां पर प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा कौशल-विकाश प्रशिक्षण दिया जाता है। एक तरह से देखा जाए, तो यह महिलाएं अपना घर भी संभाल रही हैं और पारंपरिक कला को महत्व देते हुए खुद को आर्थिक तौर पर बल देने का कार्य भी सफलता पूर्वक करती रही हैं।
उल्लेखनीय है कि न सिर्फ हिमाचल प्रदेश में बल्कि उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में महिलाएं हैंडलूम का काम कर रही हैं। वाराणसी , चित्रकूट, बांदा, ओरैया और बागपत जैसे पांच जिलों में महिलाएं हैंडलूम के जरिए अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। साथ ही पर्यटकों को ही अपने बुनाई के काम के जरिए आकर्षित करती हैं। इससे पर्यटन का लाभ सीधे तौर पर ग्रामीण कारीगरों तक पहुंच रहा है।