राजस्थान की ममता का टीचर बनने की राह नहीं रही आसान, किया संघर्ष बनीं प्रेरणा

राजस्थान की ममता के लिए जीवन आसान नहीं। कई मुसीबतों के बाद उन्होंने अपनी पहचान बनायीं। आइए जानते हैं विस्तार से।
आप कुछ करना चाहें, तो कर ही लेते हैं और अपनी खास जगह बना ही लेते हैं। राजस्थान की ममता ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। ममता का हमेशा से सपना था कि वह एक शिक्षिका बनें, लेकिन वह यह कर नहीं पा रही थीं, लेकिन फिर उन्होंने यह कर दिखाया, वह भी अपनी लगन और मेहनत से। उन्होंने पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, जयपुर में PRT (प्राइमरी टीचर) बनने का अपना सपना पूरा किया, गौरतलब है कि शादी के बाद ममता ने अपने दोनों बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने के लिए अपने प्रोफेशनल लक्ष्यों को कुछ समय के लिए रोक दिया था। उन्हें कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं में कई बार असफलता का सामना करना पड़ा और हार मान लेने के लिए भारी सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा। वहीं पुलिस में काम करने वाले अपने पति के सहयोग से, वह अपनी तैयारी को नए सिरे से शुरू करने के लिए अपने माता-पिता के घर चली गयीं और उन्होंने लाइब्रेरी में घंटों पढ़ाई की, जबकि उनकी मां ने उनके बच्चों की देखभाल में मदद की। आखिरकार उन्होंने परीक्षा पास की और केंद्रीय विद्यालय में अपनी मौजूदा नौकरी हासिल की। वाकई, ममता के साथ-साथ उनकी माताजी की भी तारीफ होनी चाहिए, जो हमेशा एक अच्छी सपोर्ट सिस्टम बन कर ममता के साथ रहीं। उन्हें लोगों ने काफी ताने भी दिए कि काम की दुनिया में दोबारा कदम रखने वाले कई अनुभवी लोगों की तरह, उन्हें भी समाज के दबाव और उन लोगों की बातों का सामना करना पड़ा, जिनका मानना था कि कॉम्पिटिटिव भर्ती परीक्षा पास करने या टीचिंग की नौकरी पाने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है। लेकिन उन्होंने हर नहीं मानी। कई बार ऐसा हुआ जब वह बस कुछ ही नंबरों से सिलेक्शन से चूक गईं। फिर भी वह हार नहीं मानीं और कामयाब हुईं। सच में मानना होगा कि ऐसी प्रेरणाएं सामने आएं, ताकि बाकी महिलाएं भी प्रेरित हों।
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